सामाजिक न्याय का बुरा हाल

योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लिए हैं। इन तीन सालों में दलित, पिछड़े, आदिवासियों के अधिकारों में ज़बरदस्त कटौती की गयी है। प्रदेश के विद्यालयों में मिड डे मील योजना में बच्चों के साथ भेदभाव लगातार जारी है। छात्रों की छात्रवृत्ति में घोटाले बढ़ें हैं। प्रोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर किया गया है। दलितों-पिछड़ों पर होने वाली हिंसा और प्रताड़ना की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। कालेज और विश्वविद्यालय में आरक्षण साजिश के तहत ख़त्म किया जा रहा है। जातिगत भेदभाव चरम पर है और उसको सरकारी संरक्षण मिल रहा है। एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने की संस्थागत कोशिश हो रही है। सबसे बड़ी दलित पिछड़ों की आबादी वाले राज्य में उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक हकों पर डाका डाला जा रहा है। आइये हम आपको देते हैं यूपी के सामाजिक न्याय का लेखा-जोखा…