यूपी में क्या हुआ आज

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योगी जी का तीन साल
यूपी का बुरा हाल

योगी जी के तीन साल के शासनकाल में जनता रही बेजार, रोज़ हो रहे हत्या और बलात्कार, बदहाल किसान, बेरोजगार और युवा परेशान, गड्ढायुक्त सड़कें, असुरक्षित समाज, व्यापारियों का बुराहाल, सिसकतीं कन्याएं, बीमार अस्पताल तो कैसे कहें की उपलब्धियों भरा रहा यह तीन साल 

यूपी सरकार से जनता मायूस

प्रदेश सरकार पिछले तीन वर्षों में समाज के किसी भी वर्ग की आशा और आकांक्षा को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है जनता जिसमें किसान, मजदूर, युवा, महिला, दलित, पिछड़ा, आदिवासी, अल्पसंख्यक आदि सारा समाज आता है जो खुद को निराश और हताश महसूस कर रहा है 

बेईमानी साबित हो रहा है बेटी
बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असुरक्षित वातावरण इस सरकार में प्रदेश की बहन, बेटियों को सहन करना पड़ रहा है, उन्नाव में तीन-तीन बलात्कार की क्रूर घटनाएं हुईं, तो वहीं शाहजहानपुर के पूर्व सांसद ने इस घिनौनी घटना को अंजाम दिया, योगी सरकार पीड़ित के साथ न्याय करने के बजाए लगातार अपने सांसद और विधायक को बचाने में लगी रही 

रिपोर्ट कार्ड पर एक नज़र​

किसानों की आमदनी दो गुनी, पूर्ण कर्जा माफ़ी और गन्ना किसानों को 14 दिन में पूर्ण भुगतान जैसे लोक लुभावने वादे के साथ भाजपा की सरकार योगी के नेतृत्व में बनी थी। आज योगी सरकार के तीन साल बीत जाने पर प्रदेश के अन्नदाता बद से और बदहाली की तरफ धकेले जा चुके हैं। ऋण माफ़ी के नाम पर 5 से 7 रूपये के चेक बाँट कर उनकी गरीबी का सरेआम मजाक उड़ाया गया है। बीते दिनों हुयी बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने उनकी कमर तोड़ दी है प्राकृतिक मार से किसान कराह उठा है। किसानों की 50% से अधिक फसलों को नुकसान हुआ है। सरकार की तरफ से हमेशा की तरह कागज़ी और कोरे आश्वासन ही दिए जा रहें हैं। अन्नदाता हताश और निराश हो चुका है। आईये जाने प्रदेश के किसानों की दुर्दशा का हाल…

उत्तर प्रदेश में भाजपा और योगी की सरकार ने तमाम सतरंगी वादे किये थे। पर आज तीन साल बीतने के बाद भी हालात जस के तस हैं। प्राथमिक, माध्यमिक सहित उच्च शिक्षा का बुरा हाल है। गरीब और दलित समुदाय को मिलने वाली छात्रवृत्ति में घोटाले हो रहे हैं। मिड डे मील में घटिया भोजन परोसा जा रहा है और छात्रों के बीच भेदभाव किया जा रहा है। स्कूली ड्रेस, जूते, पुस्तकें और बस्ते समय से विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहीं हैं। सभी स्तर के विद्यालयों की स्थिति जर्जर हो चुकी है। शिक्षक-छात्र अनुपात बढ़ रहा है। शिक्षा की गुणवत्ता लगातार बदतर हो रही है। आइये जानते हैं यूपी की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को…

योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे कर लिए हैं। इन तीन सालों में दलित, पिछड़े, आदिवासियों के अधिकारों में ज़बरदस्त कटौती की गयी है। प्रदेश के विद्यालयों में मिड डे मील योजना में बच्चों के साथ भेदभाव लगातार जारी है छात्रों की छात्रवृत्ति में घोटाले बढ़ें हैं। प्रोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को कमजोर किया गया है। दलितों-पिछड़ों पर होने वाली हिंसा और प्रताड़ना की घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। कालेज और विश्वविद्यालय में आरक्षण साजिश के तहत ख़त्म किया जा रहा है। जातिगत भेदभाव चरम पर है और उसको सरकारी संरक्षण मिल रहा है। एससी-एसटी एक्ट को कमजोर करने की संस्थागत कोशिश हो रही है। सबसे बड़ी दलित पिछड़ों की आबादी वाले राज्य में उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक हकों पर डाका डाला जा रहा है। आइये हम आपको देते हैं यूपी के सामाजिक न्याय का लेखा-जोखा…

योगी सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। मार्च 2017 में सत्ता में आते ही योगी सरकार ने भ्रष्टाचार को सिरे से उखाड़ने का दावा किया था। पर इन तीन सालों में सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचारी खूब फले फूले। अवैध खनन हो या मिड डे मील या गड्डा मुक्त सड़कें करने का अभियान, हर विभाग में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरो का जाल फैला है। शिक्षा विभाग में फर्नीचर खरीद के घोटाले सामने आ रहें हैं तो कहीं किताबों, स्वेटर और जूते खरीद में लाखों करोड़ों के घोटाले अखबार की सुर्खी बन रहें हैं। पॉवर कारपोरेशन का पीएफ घोटाला उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े घोटाले के रूप में सुर्ख़ियों में रहा है। अनाज कालाबाजारी में प्रदेश अव्वल है। केंद्रीय मंत्री खुद लोकसभा में स्वीकारते हैं कि पीडीएस में भ्रष्टाचार की कुल 807 शिकायतें मिली हैं जिनमें सबसे अधिक 328 शिकायतें उत्तर प्रदेश से आई हैं। भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कहने वाली योगी सरकार में फिलहाल भ्रष्टाचार का ही बोलबाला है।

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